व्यक्तित्व मानव जीवन को अधिक सरल बनाता है। व्यक्तित्व के कई मनोवैज्ञानिकों ने अलग अलग प्रकार बताये है जिनके बारे में हम विस्तार से अध्ययन करेंगे।
हिपोक्रेटस के अनुसार व्यक्तित्व के प्रकार
हिप्पोक्रेट्स ने द्रव्यों के आधार पर व्यक्तित्व को चार भागों में बांटा जो की निम्न प्रकार है।
- पीला पित्त - जिन लोगों में पीला पित्त अधिक होता है, वह चिड़चिड़ा होते हैं और तुनक मिजाज होते हैं और बेचैन रहते हैं। इनके व्यक्तित्व को कालरिक कहा गया।
- काला पित्त - जिन लोगों में यह अधिक होता है, वह उदास रहते हैं, निराशावादी होते हैं। इनके व्यक्तित्व को मेलन कोलिक कहा गया।
- रक्त - जिन लोगों में यह अधिक होता है वह प्रसन्न रहते हैं, खुशमिजाज रहते हैं। इनके व्यक्तित्व को सेन्चाइन कहा गया।
- श्लेष्मा - यह लोग निष्क्रिय रहते हैं और शांत पड़े रहते हैं। इनके व्यक्तित्व को श्लेषात्मक कहा गया।
शेल्डन के अनुसार व्यक्तित्व के प्रकार
शारीरिक संरचना के आधार पर बांटा गया। शेल्डन ने शरीर की रचना के आधार पर व्यक्तित्व को तीन भागों में बांटा।
- एंडोमोरफिक - यह वह लोग होते हैं जिनका कद छोटा और शरीर मोटा होता है, यह लोग खाने-पीने के शौकीन होते हैं, आराम पसंद होते हैं, मिलनसार होते हैं और इनके स्वभाव को विसेरोटोनिया कहा गया।
- मेसोमोरफिक - यह वह लोग होते हैं जिनके कद और वजन में अनुपात होता है। इन की मांसपेशियां होती है और यह आक्रामक होते हैं। इनके स्वभाव को सोमेटोटोनिया कहा गया।
- ऐक्टोमोरफिक - यह वह लोग होते हैं जो लंबे और पतले दुबले होते हैं। यह संवेदनशील होते हैं जीवन में उपलब्धियों को प्राप्त करना चाहते हैं और धार्मिक होते हैं। इनके स्वभाव को सेरिबरोटोनिया कहा गया।
इसी प्रकार शरीर रचना के आधार पर क्रेशमर ने भी व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया। शेल्डन ने जिसे एंडोमोरफिक कहा उसे केशमर ने पिकनिक कहा। मेसोमोरफिक को एथलेटिक कहा और एक्टमॉर्फिक को एस्थेनिक कहा। डिस्प्लास्टिक वह लोग होते हैं, जिसमें तीनों प्रकार के मिश्रण हो।
कार्ल युंग के अनुसार व्यक्तित्व के प्रकार
मनोवैज्ञानिक आधार पर वर्गीकरण किया। कार्ल युंग ने व्यक्तित्व को दो भागों में बांटा - बहिर्मुखी और अंतर्मुखी।
- बहिर्मुखी - बहिर्मुखी व्यक्तित्व वह होता है, जो मिलनसार होता है, पार्टियों में जाना पसंद करता है अपनी बात को कहीं भी कह देता है।
- अंतर्मुखी - यह अकेला रहना पसंद करता है, संकोची स्वभाव का होता है, बात कहने में संकोच होता है। संवेदनशील होता है।
ऐसे व्यक्ति जो अंतर्मुखी और बहिर्मुखी दोनों प्रकार के गुण को हो उन्हें उभयमुखी कहते हैं। अगर एक शिक्षक को इस बात का ज्ञान हो कि उसका छात्र अंतर्मुखी है या बहिर्मुखी, तब उसके दो लाभ होंगे - कक्षा की गतिविधियों का संचालन सुचारु रुप से कर सकता है और अपने छात्रों को व्यवसायिक मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।
रोटर का वर्गीकरण
रोटर ने व्यक्तित्व को दो भागों में बांटा - बाहरी नियंत्रण वाला और आंतरिक नियंत्रण वाला।
- बाहरी नियंत्रण वाला व्यक्तित्व - वह जो अपनी असफलताओं का विश्लेषण बाहर की शक्तियों के आधार पर करता है या तारत्व दूसरों पर दोषारोपण करता है।
- आंतरिक नियंत्रण वाला व्यक्तित्व - यह वह व्यक्तित्व है जो अपना विश्लेषण इमानदारी से वस्तुनिष्ठ तरीके से करता है, कमजोरियों को स्वीकार करता है। इस प्रकार के छात्र जीवन में आगे बढ़ते हैं और उनके व्यवहार में सुधार करना आसान होता है।
स्प्रेंगर का वर्गीकरण
स्प्रेंगर ने मूल्यों के आधार पर व्यक्तित्व के छह प्रकार बताएं, जो की निम्न प्रकार है।
- सैद्धांतिक व्यक्तित्व - यह वह व्यक्ति है जिनमें ज्ञान अर्जित करने की भूख अधिक होती है, यह अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करना चाहते हैं।
- आर्थिक व्यक्तित्व - यह व्यक्ति धन और भौतिक सुख-सुविधाओं में अधिक विश्वास करते हैं।
- राजनीतिक व्यक्तित्व - यह वह लोग हैं जो राजनीतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
- धार्मिक व्यक्तित्व - जो धार्मिक कर्मकांडो में अधिक विश्वास रखते हैं, उस व्यक्तित्व को धार्मिक कहा गया।
- सामाजिक व्यक्तित्व - यह वह व्यक्ति होते हैं जो सामाजिक गतिविधियों में अधिक ध्यान देते हैं। जैसे अनाथ आश्रम, वृद्ध आश्रम आदि।
- कलात्मक व्यक्तित्व - यह वह व्यक्ति होते हैं जो प्राकृतिक सुंदरता, चित्रकला संगीत आदि में अधिक ध्यान देते हैं।
व्यक्तित्व की परिभाषाएं
- गिलफोर्ड के अनुसार "व्यक्तित्व गुणों का एक समन्वित रूप है"।
- वुडवर्थ के अनुसार "व्यक्तित्व व्यक्ति के व्यवहार की एक समग्र विशेषता है"।
- बिग और हंट के अनुसार "व्यक्तित्व किसी व्यक्ति के संपूर्ण व्यवहार प्रतिमान की समस्त विशेषताओं का योग है"।
- बेसिल के अनुसार "व्यक्तित्व शब्द का प्रयोग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, नैतिक और सामाजिक गुणों के उस एकीकृत तथा गत्यात्मक संगठन के लिए किया जाता है, जिसे व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के साथ अपने सामाजिक जीवन के आदान-प्रदान में व्यक्त करता है।

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