पठन या वाचन का अर्थ सामान्यतः किसी भी लिखी हुई भाषा को पढ़कर उसके अर्थ को ग्रहण करना ही पठन या वाचन कहलाता है। आज इस लेख में हम पठन या वाचन के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने वाले है, यदि आप वाचन के बारे में विस्तार से जानना चाहते है तो इस लेख को आखिर तक पढ़ते रहिये।
पठन या वाचन की परिभाषाएं
- रमन बिहारी लाल के अनुसार "शब्दों के उच्चारण मात्र कोई वाचन या पठन नहीं कह सकते, क्योंकि उच्चारण के साथ उसके अर्थ या भाव को समझना भी आवश्यक होता है"।
- डॉक्टर उमा मंगल के अनुसार "वास्तव में लिखित सामग्री को पढ़ते हुए अर्थ प्रकट करने की प्रक्रिया को ही पठन या वाचन कहते है"।
- ल्यूस के अनुसार "वाचन एक साधन है इसके माध्यम से बालक संपूर्ण मानवता की संचित ज्ञान राशि से परिचित होता है"।
पठन या वाचन को प्रभावित करने वाले कारक अथवा तत्व
वाचन को प्रभावित करने वाले तत्व निम्न प्रकार हैं-
#1 वातावरण
पठन या वाचन के लिए शांत वातावरण अति आवश्यक होता है, क्योंकि वाचन करने के लिए बुद्धि का स्तर होना अति आवश्यक है। यह तभी संभव है जब हमारे आसपास का वातावरण अति शांत हो और वाचन करने योग्य हो।
#2 शरीरिक व्यवस्था
शरीर के किसी भी अंग में दोष, विकार या रोग होने से वाचन में दोष आ जाता है। जैसे दृष्टि दोष वाले बालकों को अक्षर पहचानने में कठिनाई होती है, जिससे वे आसानी से वाचन नहीं कर पाते है।
#3 अनुभव
बालक के पास शब्द और विषय का जितना अधिक अनुभव होगा, वह उतना ही शीघ्रता और कुशलता से वाचन कर पाएगा।
#4 मानसिक विकास
उच्चारण, अर्थ, ग्रहण, वाचन आदि पर इसका प्रभाव पड़ता है, दुर्बल की अपेक्षा संबल बुद्धि वाले शीघ्र वाचन करते है।
#5 मनोभाव
क्रोध, निराशा, लज्जा आदि व्यवस्थाओं में शुद्ध वाचन नहीं होता है। इसके लिए शांत मनोभावों की आवश्यकता होती है।
#6 शब्दावली
शब्दों के पोस्ट पर भी वाचन की सफलता, विफलता, तृप्ता और मंदता निर्भर करती है।
वाचन के प्रकार
वाचन दो प्रकार का होता है सस्वर वाचन और मौन वाचन। सस्वर वाचन दो प्रकार का होता है आदर्श वाचन और अनुकरण वाचन। आदर्श वाचन अध्यापकों द्वारा किया जाता है। अनुकरण वाचन व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से किया जाता है।
वाचन संबंधित त्रुटियां
- शब्दों पर सही पकड़ नहीं होने के कारण शब्दों को अटक अटक कर पढ़ना।
- भाषागत अशुद्धियों अथवा अशुद्ध उच्चारण।
- उचित प्रभाव व गति के साथ नहीं पढ़ना।
- शब्दों को सही प्रकार से नहीं समझना।
- दृष्टि दोष के कारण शब्दों का सही न दिखना।
- भाव अनुकूल अभिव्यक्ति का अभाव।
- शब्दों ध्वनियों की जानकारी का अभाव।
- अध्यापक का कक्षा गत व्यवहार।
- वाचन संबंधी मार्गदर्शन का अभाव।
- नवीन तथा अपरिचित शब्दों को ठीक प्रकार से ना पढ़ सकना।
- वाचन के समय अर्थ को ना समझना।
- शब्दों को एक-एक करके पढ़ना।
- भय तथा संकोच का पठन में बाधक होना।
पठन अथवा वाचन संबंधित त्रुटियों का निवारण
- बालकों को व्याकरण संबंधी जानकारी प्रदान करना।
- शब्दों की ध्वनियों का प्रयोग और अभ्यास सिखाना।
- छात्रों के मानसिक स्तर के अनुकूल पाठ्य सामग्री का चुनाव।
- सरल और आकर्षक पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना साथ-साथ कुछ विशेष शब्दों का अभ्यास कराना।
- शिक्षक द्वारा छात्रों को उचित मार्गदर्शन समय-समय पर दिया जाना चाहिए ताकि कमियों को तुरंत सुधारा जा सके।
- वाचन करते समय जहां से भी कठिनाई अथवा असत्य अस्पष्टता हो उसे स्पष्ट करते रहना चाहिए।
- दृष्टि दोष होने पर ऐनक अथवा उपचार द्वारा निवारण करने का प्रयास करना चाहिए।
सस्वर वाचन के गुण
- शुद्ध व स्वच्छ उच्चारण के साथ पढ़ना।
- विराम चिन्हों का सुनियोजित तरीके से ध्यान रखते हुए पढ़ना।
- और ओवरों के साथ पढ़ना।
- भाव अनुरूप अवसर के अनुरूप पढ़ना।
- श्रोताओं की संख्या व अवसर के अनुसार वाणी को नियंत्रित करना।
- उच्चारण एवं स्थानीय बोलियों का प्रभाव ना आने देना।
आदर्श वाचन के उद्देश्य
- छात्रों के समक्ष वाचन का एक मानदंड उपस्थित करना।
- छात्रों को यह समझाना कि उन्हें कहां तक पढ़ना है.
- अपरिचित पाठ्य सामग्री छात्रों के मन में व्याप्त थी वह दूर करना।
- छात्रों को उचित गति विराम उच्चारण स्पष्टता आदि का ध्यान रखते हुए वाचन करने की प्रेरणा देना।
अनुकरण वाचन के उद्देश्य
- शिक्षक द्वारा दिए गए आदर्श वाचन का अनुकरण करना।
- उच्चारण को शुद्ध बनाना।
- पाठ के भाव के अनुसार वाचन करने की क्षमता प्राप्त करना, जैसे बारिश बरसे वीर रस की सामग्री में, उच्च स्वर से संहार व स्नेह की युक्त माधुरी स्वर में, करुण रस में दया स्वर में, भक्ति रस में शांत हुआ, गंभीर से वाचन का करने की योग्यता प्राप्त करना।
- वाचन में गति व प्रवाह का ध्यान रखना।
- वाचन करते समय अर्थ ग्रहण करने की योग्यता का विकास करना।
मौन वाचन के उद्देश्य
- सीकरी भाषा का अभ्यास करना।
- साहित्य से परिचय कराना।
- अवकाश का सदुपयोग करना।
- सूचना एकत्रित करना आनंद प्राप्त करना।
मौन वाचन की उपयोगिता
- नेत्र तथा मस्तिष्क का सक्रिय होना।
- बिना थके लंबे समय तक पढ़ना।
- कम समय में अधिक पढ़ना।
- एकाग्रता समग्रता के साथ अध्ययन।
- अवकाश के समय का सदुपयोग।
- गहन अध्ययन स्वाध्याय।
गंभीर मौन वाचन के उद्देश्य
- भाषा पर अधिकार बनना।
- विषय वस्तु का अधिकार करना।
- नवीन सूचना एकत्रित करना।
- केंद्रीय भाव की खोज करना।
गंभीर मौन वाचन की उपयोगिता एवं महत्व
- गहन पठन के माध्यम से छात्रों में स्वाध्याय की प्रवृत्ति का विकास किया जाता है, क्योंकि पाठ्यवस्तु छात्रों को रुचिकर लगती है, उसको छात्र स्वयं प्रेरणा से पढ़ने का प्रयास करते है।
- गहन पठन के माध्यम से छात्रों में तर्क और चिंतन का विकास किया जाता है, क्योंकि ग्रहण पाटन करते समय छात्र पाठ्यवस्तु प्रत्येक तथ्य का गहराई से चिंतन व मनन करता है।
- गहन पठन के द्वारा छात्रों को मानसिक विकास की स्थिति उत्पन्न होती है, क्योंकि गहन पठन एक मानसिक कृति है इसमें मानसिक मंथन व्यापक रूप से संभव होता है।
- गहन पठन पाठ्यवस्तु के प्रति जागरूकता प्रदान करता है, क्योंकि इसमें किसी निश्चित तथ्य एवं पाठक निश्चित उद्देश्य की खोज करता है। इसलिए यह पठन जागरूकता के साथ-साथ क्रिया को संभव बनाता है।
- पठन के माध्यम से छात्रों में पाठ्यवस्तु में छिपी शिक्षा एवं उद्देश्य को आत्मसात करने की योग्यता विकसित की जाती है छात्र उस उद्देश्य और शिक्षा का उपयोग अपने जीवन में कर सके।

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