किशोरावस्था में शारीरिक विकास

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था में सर्वाधिक परिपक्वता प्राप्त होती है। इस अवस्था में बालक बालिकाओं के भीतर पर्याप्त शारीरिक व मानसिक परिवर्तनों का होना आवश्यक है। क्योंकि इन परिवर्तनों से उत्पन्न होने वाले मानसिक, सामाजिक व संवेगात्मक परिवर्तन किशोरावस्था की परिपक्वता को प्रभावित करते हैं। परिवर्तन की इस अवस्था में माता-पिता, शिक्षक, अभिभावक तथा अन्य लोग जो बालक के कल्याण में रुचि रखते हैं उन्हें किशोरों के विकास पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।

किशोरावस्था शब्द अंग्रेजी भाषा के Adolsence शब्द का हिंदी रूपांतरण है जिसकी उत्पत्ति लेटिन भाषा के Adolscere शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है परिपक्वता की ओर बढ़ना।

किशोरावस्था की परिभाषाएं

स्टैनले हॉल के अनुसार "किशोरावस्था बड़े संघर्ष तूफान व विरोध की अवस्था है"।
बिग व हंट के अनुसार "किशोरावस्था के समुचित अर्थ को प्रकट करने वाला शब्द है। परिवर्तन यह परिवर्तन शारीरिक सामाजिक व मनोवैज्ञानिक होता है"।
 

किशोरावस्था की अवस्थाएं

विद्वानों ने किशोरावस्था को दो भागों में बांटा है - पूर्व किशोरावस्था (13 से 16 वर्ष तक ) उत्तर किशोरावस्था (17 से 21 वर्ष तक)।

#1 पूर्व किशोरावस्था

पूर्व किशोरावस्था 13 वर्ष से प्रारंभ होकर 16 17 वर्ष तक चलती है यह अवस्था सामान्य समस्या बाहुल्य की अवस्था रहती है। क्योंकि धूर्त शारीरिक परिवर्तन होने के कारण समायोजन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती है। 

#2 उत्तर किशोरावस्था

यह अवस्था 16 - 17 वर्ष से 21 वर्ष तक चलती रहती है। विकास की दृष्टि से यह अवस्था अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यह काल रोड जीवन की तैयारी का समय भी होता है। इस अवस्था में जिस प्रकार के व्यवहार रुचियां दिन निर्धारित किए जाते हैं वह प्रौढ़ जीवन का आधार बनते हैं।

किशोरावस्था के विकास के सिद्धांत 

#1 त्वरित विकास का सिद्धांत

किशोरावस्था के विकास के संबंध में स्टैनले हॉल ने माना है कि "किशोरावस्था में होने वाला परिवर्तन आकस्मिक होते हैं उनका पूर्व के विकास से कोई संबंध नहीं होता"।

#2 क्रमिक विकास का सिद्धांत

इस सिद्धांत के समर्थक थॉर्डाइक किंग और होलिंगवर्थ के मतानुसार किशोरावस्था के विकास क्रम में उत्पन्न जो विभिन्न बताएं और नवीनता ही दिखाई देती है। वह एकदम आकर धीरे-धीरे आती है इस संबंध में किंग का कथन है कि इस प्रकार एक ऋतु के आगमन के चिन्ह दिखाई देने लगते हैं उसी प्रकार बाल्यावस्था किशोरावस्था एक दूसरे से संबंधित रहती है।

किशोरावस्था की विशेषताएं 

  1. परिवर्तन की अवस्था
  2. संक्रांति का काल
  3. निश्चित विकास प्रतिमान
  4. शैशवावस्था की पुनरावृति
  5. आदर्शवाद व वीर ऊर्जा की अवस्था
  6. समूह का महत्व
  7. रुचियों में परिवर्तन
  8. स्वतंत्रता व विद्रोह की भावना
  9. आत्मनिर्भरता की अवस्था
  10. अपराध प्रवृति का विकास
  11. प्रौढ़ जीवन की तैयारी की अवस्था 

किशोरावस्था में शारीरिक विकास 

किशोर बालकों की शादी विकास में परिवर्तन की गति एक समान नहीं होती। पूर्व किशोरावस्था में यह गति तीव्र हो जाती है वही उत्तर किशोरावस्था मैं धीमी हो जाती है। प्रत्येक किशोर का अपना विकास क्रम होता है जो परिपक्वता की क्रिया के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। किशोरों में शारीरिक परिवर्तन वृद्धि साथ-साथ होते हैं।

कॉल तथा मोरगन के अनुसार "विकास ही सभी परिवर्तन का आधार है। यदि बालक रचना एवं भार में नहीं बढ़ता है यदि उसकी मांसपेसिया शक्तिशाली नहीं होती, यदि उसके अंग विकसित नहीं होते, यदि उसके आंतरिक अंगों का आकार नहीं बढ़ता ,यदि वह विकासशील शरीर की आवश्यकता की पूर्ति कुशलतापूर्वक नहीं करते तो बालक कभी भी प्रौढ़ नहीं हो सकता"।

किशोरावस्था में शारीरिक विकास का क्रम

किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक विकास से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन निम्नांकित है।

#1 लंबाई

किशोरावस्था में बालक तथा बालिकाओं की लंबाई बहुत तीव्र गति से बढ़ती है। बालिकाएं प्राय 16 वर्ष की आयु तक तथा बालक प्राय 18 वर्ष की आयु तक अपनी अधिकतम लंबाई प्राप्त कर लेते हैं। किशोरावस्था में लंबाई में वृद्धि प्रति इंच की दर प्रति वर्ष होती है। 

#2 वजन

किशोरावस्था में बाढ़ में काफी वृद्धि होती है। बालकों का भार बालिकाओं के तुलना में अधिक तीव्र गति से बढ़ता है। इस अवस्था के अंत में बालकों का औसत भार बालिकाओं के औसत भार की तुलना में लगभग 4 से 5 किलो अधिक होता है।

#3 सिर तथा मस्तिष्क 

किशोरावस्था में सिर तथा मस्तिष्क का विकास जारी रहता है। परंतु इसकी गति काफी मंद हो जाती है लगभग 16 वर्ष की आयु तक सिर का विकास पूर्ण हो जाता है पूर्ण मस्तिष्क का भार बारह सौ ग्राम से लेकर चौदह सौ ग्राम तक होता है।

#4 हड्डियां

किशोरावस्था में हड्डियों के दृढ़ी करण की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप अस्थियों का लचीलापन समाप्त हो जाता है। किशोरावस्था के अंत तक बालकों में काफी कुछ परिपक्वता आ जाती है। तब उसकी अनेक हड्डियां परस्पर संयुक्त होने लगती है। अस्थि पंजर की कुछ हड्डियां आपस में मिलकर एक हो जाती है फलस्वरुप कुल हड्डियों की संख्या 206 जाती है।

#5 मांसपेशियां

किशोरावस्था में शरीर की मांसपेशियों का विकास तीव्र गति से होता है। किशोरावस्था की समाप्ति पर मांसपेशियों का भार शरीर के कुल भार का लगभग 45% हो जाता है।

#6 दांत 

किशोरावस्था में प्रवेश करने से पूर्व बालक तथा बालिकाओं के 27 - 28 स्थाई स्थाई दांत निकल आते हैं। चार प्रज्ञा दांत सबसे अंत में निकलते हैं। व्यक्ति के प्रज्ञा दांत प्राय किशोरावस्था के अंतिम वर्षों में अथवा प्रौढ़ावस्था के प्रारंभिक वर्षों में निकलते हैं।

#7 अन्य अंग

इसमें ज्ञानेंद्रियों का विकास हो जाता है।

शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक

  1. वंशानुक्रम
  2. वातावरण
  3. आहार
  4. रोग
  5. दिनचर्या
  6. विश्राम
  7. खेल तथा व्यायाम
  8. अंत स्त्रावी ग्रंथियां
  9. परिवार की स्थिति
  10. सामाजिक आर्थिक स्तर
  11. प्रेम तथा अनुभूतियां

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