मनोविज्ञान का विकास क्रम और प्रमुख संप्रदाय

मनोविज्ञान के विकास क्रम को कई भागों में बांटा गया है, जो कि निम्न प्रकार हैं। आत्मा का विज्ञान, चेतना का विज्ञान, मस्तिष्क का विज्ञान और व्यवहार का विज्ञान। सर्वप्रथम हम आत्मा के विज्ञान का अध्ययन करेंगे।

#1 आत्मा का विज्ञान

अरस्तु, प्लेटो, डेकोर्टे, रूडोल्फ, गोईकल के द्वारा दिया गया। अरस्तु के अनुसार मानव की पांच ज्ञानेंद्रियां आंख, कान, नाक, जीव, त्वचा स्वतंत्र रूप से ज्ञान उपलब्ध आत्मा को करवाती है। अतः हमारे शरीर में प्रमुख स्थान आत्मा का है। मानव को समझने के लिए आत्मा का अध्ययन करना चाहिए।

रूडोल्फ गोईकल ने सन 1590 में मनोविज्ञान के प्रथम ग्रंथ साइकोलॉजिया की रचना की तथा इस ग्रंथ में सर्वप्रथम Psychology शब्द का प्रयोग किया गया। मनोविज्ञान की जननी दर्शनशास्त्र को तथा जनक अरस्तु को कहा जाता है। गैरिट के अनुसार साइकोलॉजि आत्मा का अध्ययन करने वाला है। 1600 ईस्वी तक आत्मा की परिभाषा का अस्वीकारीकरण कर दिया गया, जिसके निम्न कारण थे -

  1. आत्मा अमूर्त विषय वस्तु थी, अतः इस पर प्रयोग संभव नहीं थे। इसलिए इसे विज्ञान का दर्जा नहीं दिया गया।
  2. आत्मा का कोई रंग रूप आकार प्रकार स्वाद नहीं होता है।

#2 मन मस्तिष्क का विज्ञान

1600 से 1700 ईस्वी तक इसका विकास हुआ। पाम्पोनॉजी इटली के मनोवैज्ञानिक थे। पाम्पोनॉजी के अनुसार मानव की पांच ज्ञानेंद्रियां स्वतंत्र रूप से ज्ञान मस्तिष्क को उपलब्ध करवाती है। पाम्पोनॉजी के अनुसार मन का अध्ययन करने वाला विज्ञान मनोविज्ञान कहलाता है। 1700 ईसवी तक मानवीय मस्तिष्क के विज्ञान की परिभाषा को अस्वीकारीकरण कर दिया गया। इस परिभाषा में वही कमियां रही जो आत्मा के विज्ञान में थी।

#3 चेतना का विज्ञान

विलियम वुण्ट, विलियम जेम्स, जेम्स सली ने इस विज्ञान को विकसित किया। चेतना या संवेदना मानसिक स्थिति का आंतरिक रुप कहलाती है। ज्ञानेंद्रियों के द्वारा प्राप्त प्रथम ज्ञान को संवेदना या चेतना कहा जाता है। विलियम वुण्ट ने अपने अध्ययन का प्रमुख केंद्र संवेदना या चेतना को बताया।

मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला सन 1879 में जर्मनी के लिपजींग नगर में लिपजींग विश्वविद्यालय में बनाई गई, इसका वर्तमान नाम कार्ल मार्क्स विश्वविद्यालय है। विलियम वुण्ट मनोविज्ञान के स्वरूप को प्रयोगात्मक बनाया। सन 1880 में विलियम वुण्ट के प्रयासों से मनोविज्ञान को एक स्वतंत्र विषय का दर्जा प्राप्त हुआ। अतः आधुनिक मनोविज्ञान का जनक विलियम वुण्ट को कहा जाता है। 1980 तक आते-आते चेतना के विज्ञान की परिभाषा को अस्वीकार कर दिया गया जिसके निम्न कारण थे -

  1. सिगमंड फ्रायड ने मन के तीन प्रकार बताएं - अचेतन मन, चेतन मन, अर्द्धचेतन मन।
  2. विलियम मैकड्यूगल ने अपनी पुस्तक आउटलाइन ऑफ़ साइकोलॉजि में चेतना को एक बुरा शब्द बताया।

#4 व्यवहार का विज्ञान

जॉन ब्रॉड्स वाटसन ने यह विज्ञान दिया। ब्यूरस फ्रेडरिक स्किनर, इवान पावलव, क्लॉक एडवर्ल्ड हल्ल, विलियम मेकडयूगल। व्यवहार शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग विलियम मेकडयूगल ने सन 1908 में अपनी पुस्तक आउटलाइन ऑफ़ साइकोलॉजी में किया।

मनोविज्ञान के प्रमुख संप्रदाय

#1 सस्पनावाद सम्प्रदाय / निर्मितवाद सम्प्रदाय / निर्माणवाद

इस संप्रदाय के जनक विलियम वुण्ट को कहा जाता है जो कि जर्मनी के वैज्ञानिक थे। यह मनोविज्ञान में स्थापित होने वाला प्रथम संप्रदाय है। इस संप्रदाय में सर्वाधिक महत्व संवेदना को दिया जाता है और विलियम वुण्ट ने भी अपने अध्ययन का प्रमुख केंद्र संवेदना को बनाया।

विलियम वुण्ट के अनुसार संवेदना की निश्चित संरचना होती है जो इंद्रियों द्वारा निर्मित होती है अर्थात संवेदना का निर्माण ज्ञानेंद्रियों से होता है। मनोविज्ञान में अंतरदर्शन विधि इसी संप्रदाय और विलियम वुण्ट की देन है। इसी संप्रदाय के द्वारा 1879 में मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला स्थापित की गई।

इसी संप्रदाय ने मनोविज्ञान के स्वरूप को प्रयोगात्मक बनाया और दर्शनशास्त्र से निकालकर भौतिक शास्त्र के निकट लाकर खड़ा कर दिया। सन 1880 में विलियम वुण्ट के प्रयासों से मनोविज्ञान को एक स्वतंत्र विषय का दर्जा प्राप्त हुआ है। मनोविज्ञान के आधुनिक जनक विलियम वुण्ट को कहा जाता है।

#2 कार्यवाद / प्रकार्यवाद संप्रदाय

इसके जनक विलियम जेम्स को कहा जाता है जो कि अमेरिका के मनोवैज्ञानिक थे। इनके द्वारा मनोविज्ञान की दूसरी प्रयोगशाला सन 1895 में मैसाचुसेट्स, अमेरिका में स्थापित की गई और इसमें प्रत्यक्षीकरण का प्रयोग किया गया। विलियम जेम्स प्रत्यक्षीकरण पर बल देते थे।

#3 व्यवहारवाद का संप्रदाय

जॉन ब्रॉड्स वाटसन इस विज्ञान संप्रदाय के जनक माने जाते हैं। सन 1913 ईस्वी में कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर वाटसन ने व्यवहारवाद की घोषणा की। इनके अनुसार व्यवहार के विज्ञान से जो वाद या विचार निकला है उसे व्यवहारवाद कहा गया।

व्यवहार मानसिक स्थिति का बाह्य रूप / बाह्य क्रियाएं। वाटसन द्वारा लिखित पुस्तक जो पूर्णता व्यवहार पर आधारित है। इनके द्वारा 1924 में व्यवहारवाद पुस्तक लिखी गई। वाटसन के अनुसार व्यवहार का निर्माण उद्दीपक और अनुक्रिया में के द्वारा होता है और इसके लिए अनुवांशिक गुणों की आवश्यकता नहीं होती बल्कि वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वाटसन के अनुसार आप मुझे एक दर्जन स्वस्थ शिशु दे दो, मैं बिना उनकी योग्यता परखे उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील बना सकता हूं और यहां तक कि आप कहो तो चोर भी बना सकता हूं। अथार्थ अगर आप मुझे शिशु दो मैं उसे कुछ भी बना सकता हूं।

#4 संज्ञानवाद / गेस्टाल्टवाद / समग्रवाद / पूर्णवाद सम्प्रदाय

इस संप्रदाय के जनक मैक्सवर्दीमर थे, जो जर्मनी के मनोवैज्ञानिक थे। इस संप्रदाय का आरंभ जर्मनी में सन 1911 ईस्वी में हुआ। गेस्टाल्टवाद शब्द की उत्पत्ति जर्मन भाषा के गेस्टाल्ट शब्द से हुई है, जिसका अर्थ संपूर्ण समुद्र या पूर्ण आकार होता है। इस संप्रदाय के अनुसार मनोविज्ञान व्यवहार और चेतना दोनों का विज्ञान है।

यह संप्रदाय पूर्णता पर समग्र संपूर्ण पर बल देता है। यह संप्रदाय पूर्ण से अंश की ओर कार्य करता है। इस संप्रदाय ने व्यवहारवाद संप्रदाय का विरोध किया। मनोविज्ञान में सर्वप्रथम अपनी आत्मा का त्याग किया फिर अपने मन को छोड़ा फिर चेतना को छोड़ा। वर्तमान में व्यवहार की विधि को स्वीकार करता है।

#5 मनोविश्लेषणवाद का संप्रदाय

सिगमंड फ्रायड का जन्म 6 मई 1856 को (विएना) ऑस्ट्रिया में हुआ। यह यहूदी परिवार से संबंधित थे। इन्होंने वियना में डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की और यह पागलों के डॉक्टर बने। उन्होंने हिस्ट्रीसिया पर शोध किया और पागलों पर अध्ययन किया।

इस दौरान उन्होंने पाया कि मस्तिष्क एक प्रकार का नहीं होता है। इन्होंने मन पर विश्लेषण करके इसे तीन भागों में बांटा जिसे मनोविश्लेषणवाद कहा गया। इस संप्रदाय की स्थापना नैदानिक परिस्थितियों से चिकित्सा क्षेत्र से हुई। सिगमंड फ्रायड ने कई देशों में कार्य किया, अंततः 95 वर्ष की आयु में कैंसर से लंदन में उनकी मृत्यु हो गई। प्रमुख पुस्तकें निम्न है - मनोविश्लेषणवाद, The Ego and ID और अचेतन मन।

अचेतन मन - आनंदवादी मन, सुखवादी मन, तार्किक मन ( विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण ) मन। इस मन की छोटे-छोटे बच्चों में प्रधानता होती है।

चेतन मन - नैतिक वादी मन, आदर्शवादी मन, सामाजिक मन, यथार्थवादी मन। सामाजिक करण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नैतिकता का भंडार है, आदर्श का भंडार है।

अर्ध चेतन मन - यह चेतन और अचेतन मन की मध्य की अवस्था है। याद की गई बातें अचानक भूल जाना हकलाना, हिचकिचाना।

सिगमंड फ्रायड के अनुसार व्यक्ति का अचेतन मन महत्वपूर्ण होता है, जैसा व्यक्ति का अचेतन मन होता है वैसा ही व्यक्ति होता है। विद्यार्थी को अध्ययन शील व सृजनशील बनाना है तो उसके अचेतन मन को समझना चाहिए।

#6 मानवतावाद संप्रदाय

अब्राहम मैस्लो के द्वारा दिया गया। अब्राहम मैस्लो के अनुसार मानव के जीवन में उसकी आवश्यकताओं तथा उसकी उसके भागों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मेस्लो ने कहा कि व्यक्ति को समझने के लिए उसकी मांगो या आवश्यकताओं को समझना चाहिए, क्योंकि जो व्यक्ति जिस मांगो या आवश्यकता के साथ जीवन जीता है, उसका व्यक्तित्व वैसा ही होता है।

मनोविज्ञान की प्रमुख शाखाएं

वर्तमान में मनोविज्ञान की लगभग 54 शाखाएं प्रचलित है इनमें से अधिकांश शाखाएं अमेरिका में प्रचलित है।

  1. सामान्य मनोविज्ञान - मनोविज्ञान की इस शाखा में सामान्य व्यक्तियों तथा सामान्य पशुओं के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  2. असामान्य मनोविज्ञान - मनोविज्ञान की इस शाखा में मानव तथा पशु के सामान्य तथा असामान्य व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  3. पशु मनोविज्ञान - मनोविज्ञान की शाखा में मानव और पशु दोनों के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है तथा इन दोनों के व्यवहारों की तुलना की जाती है इसलिए इसे तुलनात्मक मनोविज्ञान भी कहा जाता है।
  4. बाल मनोविज्ञान - मनोविज्ञान की शाखा में जन्म से लेकर 12 वर्ष तक के बालकों का अध्ययन किया जाता है। इस शाखा का जन्म अमेरिका में हुआ, इस शाखा के जनक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक स्टैंडली हॉल है।
  5. औद्योगिक मनोविज्ञान - इस शाखा में उद्योगों में कार्यरत विभिन्न श्रमिकों मजदूरों तथा प्रबंधकों के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  6. व्यक्तित्व मनोविज्ञान - मनोविज्ञान की इस शाखा में व्यक्तित्व तथा व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारकों आदि का अध्ययन किया जाता है।
  7. शिक्षा मनोविज्ञान - मनोविज्ञान की इस शाखा में मनोविज्ञान के विभिन्न नियमों और सिद्धांतों का शिक्षा के क्षेत्र में अनुप्रयोग है।
  8. अतींद्रिय मनोविज्ञान - इंद्रियों से परे ज्ञान का अध्ययन इस मनोविज्ञान में किया जाता है।
  9. समाज मनोविज्ञान - समाज में प्राणियों के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।

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