चिंतन का उत्कृष्ट रूप जटिल मानसिक प्रक्रिया है। हम अपना कलम रख कर भूल जाते हैं तो हम विचार करते हैं कि हमने उसे आखरी बार कहां रखा था, वह स्थान बैठने का कमरा था। इस प्रकार तर्क कर करके हम निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं कि कलम बैठने की कमरे में होगा। हम वहां जाते हैं वहां हमें कलम मिल जाता है।
इस प्रकार समस्या का समाधान हो जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि पर कार्यकारण में संबंध स्थापित करके हमें किसी निष्कर्ष पर पहुंचने या किसी समस्या के समाधान में सहायता देता है। जब हमारे सामने कोई गंभीर समस्या आ जाती है, तब हम उस समस्या के समाधान के लिए किए गए चिंतन को ही तार्किक चिंतन कहते हैं।
आज इस लेख में हम तार्किक चिंतन के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
तार्किक चिंतन की परिभाषाएं
मन के अनुसार "समस्या समाधान के लिए पूर्व अनुभव का प्रयोग करना ही तर्क है"।
गेट्स के अनुसार "इसमें समस्या का समाधान करने के लिए पूर्व अनुभव को नई विधियों से पूर्ण संग्रहित किया जाता है"।
स्किनर के अनुसार "तर्क शब्द का प्रयोग कारण और प्रभाव की संबंधों के मानसिक स्वीकृति को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह किसी और लोग इस कारण से एक घटना की भविष्यवाणी यह किसी अलौकिक घटना की किसी कारण का अनुमान हो सकती है"।
तार्किक चिंतन के सोपान
समस्या की उपस्थिति तर्क का आरंभ किसी समस्या की उपस्थिति से होता है। समस्या की उपस्थिति व्यक्ति को उसके बारे में विचार करने के लिए बाध्य करती है।
समस्या की जानकारी व्यक्ति समस्या का अध्ययन करके उसकी पूरी जानकारी प्राप्त करता है और उससे संबंधित तथ्यों को एकत्र करता है।
समस्या समाधान के उपाय व्यक्ति समस्या का समाधान करने के लिए सब उपायों के तथ्यों को इकट्ठा करके समाधान के लिए विभिन्न उपायों पर विचार करता है।
एक उपाय का चुनाव व्यक्ति समस्या का समाधान करने के लिए उपायों का चुनाव का प्रयोग कर कर के एक निश्चित उपाय का चुनाव करता है।
उपायों का प्रयोग व्यक्ति अपने निर्णय के अनुसार समस्या का समाधान करने के लिए उपाय का प्रयोग करता है।
तार्किक चिंतन के प्रकार
आगमनात्मक तर्क स्तर के द्वारा बालक अपने अनुभव व अपने द्वारा संकलित तथ्यों के आधार पर किसी सामान्य नियम का निरूपण करता है।
निगमनात्मक तर्क इसमें अन्य व्यक्तियों के अनुभव विश्वासों तथा सिद्धांतों का प्रयोग करके सकते का परीक्षण किया जाता है।

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