मानव शरीर में शैशावस्था जन्म से 5 वर्ष तक मानी गई है, शैशवावस्था में मानव का विकास बहुत तीव्र गति से होता है। बाल्यावस्था 6 वर्ष से 12 वर्ष तक मानी गई है, बाल्यावस्था में शैशवावस्था की अपेक्षा धीमा विकास होता है। आज इस लेख में हम शैशवास्था और बाल्यावस्था में शारीरिक विकास के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे। शैशावस्था और बाल्यावस्था में शारीरिक विकास निम्नलिखित प्रकार से होता है।
शैशावस्था में शारीरिक विकास
मनुष्य जीवन में शैशवास्था में शारीरिक विकास निम्न बिन्दुओ के आधार पर होता है।
#1 आकार
जन्म के समय शिशु की लंबाई लगभग 20 इंच होती है। प्राय बालक बालिका से आधा इंच लंबे होते है। प्रथम वर्ष में शिशु की लंबाई लगभग 24 इंच या 28 इंच, दूसरे वर्ष में 31 या 35 इंच तथा 6 वर्ष में 40 या 44 इंच हो जाती है।
#2 भार
जन्म के समय बालक का भार बालिकाओं से अधिक होता है। नवजात शिशु का भार 6 से 8 पौंड तक होता है। प्रथम 6 माह में शिशु का भार दुगना और 1 वर्ष में 3 गुना हो जाता है। 3 वर्ष में लगभग 20 या 25 पौंड और 6 वर्ष तक 40 पौंड हो जाता है।
#3 मांसपेशियां
शिशु की मांसपेशियों का भार उसके शरीर के कुल भार का 23% होता है। धीरे-धीरे यह भार बढ़ता है और उसकी भुजाओं का विकास तीव्र गति से होता है। प्रथम 2 वर्ष में भुजाएं दुगनी और टांगे लगभग 3/2 गुना हो जाती है। 6 वर्ष की आयु तक उनकी मांसपेशियों में लचीलापन आ जाता है।
#4 हड्डियां
नवजात शिशु की हड्डियां छोटी कोमल और लचीली होती है। हड्डियों की संख्या 270 होती है हड्डियां कैल्शियम, फास्फोरस तथा अन्य खनिज पदार्थों की सहायता से मजबूत होती है। इसे अस्थिकरण की प्रक्रिया कहते है। बालक की अपेक्षा बालिकाओं में अस्थिकरण की प्रक्रिया जल्दी होती है।
#5 दांत
जन्म काल से शिशु के दांत नहीं होते। लगभग 7 मास में दांत निकलना प्रारंभ होते है। यह अस्थाई दांत होते हैं, इनको दूध के दांत भी कहते है। 1 वर्ष की आयु तक इनकी संख्या 8 हो जाती है और लगभग 4 वर्ष की आयु तक सब दांत निकल जाते है। इसके बाद यह दांत गिर जाते हैं और पांचवी या 6 वर्ष की आयु में स्थाई दांत निकलने लगते है।
#6 सिर व मस्तिष्क
नवजात शिशु का सिर शरीर की अपेक्षा बड़ा होता है। जन्म के समय सिर की लंबाई उसके शरीर के कुल लंबाई की 1/4 होती है। प्रथम 2 वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ता है उसके बाद विकास की गति धीमी धीमी हो जाती है। जन्म के समय मस्तिष्क का भार 350 ग्राम होता है। 6 वर्ष की आयु तक यह बढ़कर 1260 ग्राम हो जाता है।
#7 शिशु के आंतरिक अंगों का विकास
जन्म के बाद शरीर के आंतरिक अंगों का विकास होता है। इसमें पाचक अंग, फेफड़े, मांसपेशियां, स्नायु मंडल रक्त संचार तंत्र तथा ग्रंथियों का क्रम से विकास होता है।
बाल्यावस्था में शारीरिक विकास
बाल्यावस्था को 6 से 12 वर्ष तक की आयु तक माना जाता है। इस अवस्था में निम्नलिखित शारीरिक परिवर्तन होते है।
#1 लंबाई
लंबाई में वृद्धि की दृष्टि से यह काल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवस्था में प्रतिवर्ष 2 से 3 इंच लंबाई बढ़ती रहती है। 6 से 9 वर्ष में बालिकाओं की लंबाई बालकों की अपेक्षा कम रहती है। 10 वर्ष में दोनों की लंबाई लगभग समान रहती है तथा 12 वर्ष में बालिका ही बालकों की अपेक्षा अधिक लंबी होती है।
#2 भार
लंबाई की भांति भार में भी बालिकाएं 9 वर्ष तक बालिका, बालकों से कम रहती है तथा 10 से 12 वर्ष में बालको से अधिक हो जाती है।
#3 मस्तिष्क
इस अवस्था में सिर का विकास तो होता है किंतु शरीर और सिर के अनुपात में इसके शरीर और सिर के अनुपात ही समानता की ओर प्रवृत्त होने लगता है। शैशवावस्था के अंत तक मस्तिष्क का विकास 90% होता है जो बाल्यावस्था के अंत तक बढ़कर 95% हो जाता है।
#4 मांसपेशियां
बाल्यावस्था में मांसपेशियों का विकास मंद गति से होता है। 8 वर्ष तक की आयु में मांसपेशियों का भार कुल शरीर के भार का 27% होता है जो 12 वर्ष में बढ़कर 33% हो जाता है।
#5 धड़ का विकास
बाल्यावस्था में बालक एवं बालिकाओं के धड़ का विकास महत्व रखता है। इस आयु में शरीर बलिष्ठ पुष्ट तथा शक्तिशाली होने लगता है। जिससे बालक अपने अंगों के संचालन पर नियंत्रण प्राप्त कर लेते है।
#6 हाथ व पैर
बाल्यावस्था में बालकों के पैर लंबे व सीधे हो जाते हैं तथा बालिकाओं के पैर अंदर की और कुछ झुकाव ले लेते है। भुजाएं लंबी होने लगती है।
#7 दांत
बाल्यावस्था के आरंभ में दूध के दांत गिरने लगते हैं और नए स्थाई दांत आने प्रारंभ होने लगते है। लगभग 12 13 वर्ष की आयु में सभी दांत आ जाते है। सामान्यतः दांतो की संख्या 27-28 होती है।
#8 प्रजनन अंगों का विकास
बालको तथा बालिकाओं के प्रजनन अंगों का विकास भी बाल्यावस्था में होने लगता है, किंतु बालकों में यह विकास धीमी गति से होता है। 11-12 वर्ष तक आते-आते बालिकाओं के प्रजनन अंगों का विकास तेज गति पकड़ लेता है।
#9 हृदय गति
शैशावस्था की तुलना में बाल्यावस्था में हृदय की धड़कनों की गति कम हो जाती है। 18 वर्ष के बालकों का हृदय प्रति मिनट 85 बार धड़कता है।

Post a Comment