किसी भी व्यक्ति या समूह की सामाजिक स्थिति या पद में परिवर्तन होना सामाजिक गतिशीलता कहलाता है। सामाजिक गतिशीलता का प्रमुख आधार शिक्षा को माना जाता है। जैसा कि डॉ रामपाल सिंह वर्मा बोलते हैं, व्यक्ति जब अवसरों की समानता का प्रयोग, योग्यताओं एवं क्षमताओं के आधार पर करके उच्च स्थिति को प्राप्त करता है तो यह सामाजिक परिवर्तन कहलाता है।
जब यह सामाजिक परिवर्तन का विचार व्यक्ति के पद, प्रतिष्ठा, स्थान, सम्मान एवं स्थिति में परिवर्तन कर देता है तो उसे सामाजिक गतिशीलता कहा जाता है।
सामाजिक गतिशीलता की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
मिलर के अनुसार "सामाजिक गतिशीलता व्यक्ति तथा समाज का एक ढांचे से दूसरे ढांचे में परिवर्तन की गति को कहा जाता है"।
बोगार्ड्स के अनुसार "व्यक्ति के सामाजिक पदों में होने वाला कोई भी परिवर्तन सामाजिक गतिशीलता कहलाता है"।
सोरोकिन के अनुसार "सामाजिक गतिशीलता का अर्थ है सामाजिक समूह एवं स्तरों में किसी व्यक्ति का एक सामाजिक स्थिति से दूसरे सामाजिक स्थिति में पहुंचना"।
सामाजिक गतिशीलता की विशेषताएं
- सामाजिक गतिशीलता व्यक्ति या समूह के पद या स्थिति से संबंधित होते है।
- सामाजिक गतिशीलता व्यक्ति या समूह की पद या स्थिति में परिवर्तन से संबंधित होते है।
- सामाजिक गतिशीलता किसी व्यक्ति या समूह की संरचना के अंतर्गत होती है।
- सामाजिक गतिशीलता धनात्मक एवं ऋणात्मक दोनों प्रकार की होती है।
सामाजिक गतिशीलता के प्रकार
सोरोकिन के अनुसार सामाजिक गतिशीलता के दो प्रकार माने गए है।
- सामाजिक समतल गतिशीलता (क्षेतीज गतिशीलता)
- शीर्षात्मक गतिशीलता (ऊर्ध्वाधर गतिशीलता)
#1 समतल सामाजिक गतिशीलता
इसे क्षेतीज गतिशीलता भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति या समूह का परिवर्तन समान स्थिति वाले वर्ग या समूह में होता है। जैसे किसी जिलाधीश का सचिवालय के किसी भी समान वेतन या प्रतिष्ठा वाले पद पर स्थानांतरण करना या माध्यमिक स्तर के प्रधानाध्यापक का उप जिला शिक्षा अधिकारी बनना। समतल सामाजिक गतिशीलता निम्न प्रकार की होती है।
- जाति समूह लिंग आयु आदि पर आधारित गतिशीलता
- व्यवसाय गतिशीलता
- धार्मिक गतिशीलता
- परिवारिक गतिशीलता
- दलदल गतिशीलता
- क्षेत्रीय गतिशीलता
- अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता
#2 शीर्षात्मक सामाजिक गतिशीलता
शीर्षात्मक गतिशीलता को ऊर्ध्वाधर गतिशीलता भी कहते है। इसमें विभिन्न वर्गों एवं समूहों की स्थिति एक समान ना होने के कारण व्यक्ति अथवा वर्ग का नीचे से ऊपर या ऊपर से नीचे पद एवं स्थिति में परिवर्तन होता रहता है।
सोरोकिन के अनुसार किसी व्यक्ति के एक सामाजिक स्थिति से दूसरी सामाजिक स्थिति में परिवर्तन होने से उत्पन्न होने वाले संबंधों को शीर्षात्मक गतिशीलता कहा जाता है। इसके दो प्रकार होते हैं आरोही और अवरोही। आरोही का अर्थ किसी भी व्यक्ति अथवा वर्ग का नीचे से ऊपर की ओर बढ़ना आरोही क्रम कहलाता है तथा किसी भी व्यक्ति का ऊपर से नीचे की स्थिति में आना अवरोही क्रम कहलाता है।
सामाजिक गतिशीलता को प्रभावित करने वाले कारक
- आर्थिक कारण
- सामाजिक कारण
- जनसंख्या संबंधी कारण
- व्यवसायिक कारण
- राजनीतिक कारण
- महत्वकांक्षाएँ
- शैक्षणिक कारण
सामाजिक गतिशीलता के गुण अथवा लाभ
- इसके द्वारा सही स्थान पर सही व्यक्ति का चुनाव हो पाता है।
- व्यक्तिगत एवं सामाजिक कुशलता में वृद्धि होती है।
- सामाजिक प्रगति संभव हो पाती है।
- समाज में खुशहाली आती है।
- विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत एवं सामाजिक बुराइयों का समाधान हो पाता है।
- कुसमायोजन की समस्या का समाधान हो पाता है।
- बालक का सर्वांगीण विकास हो पाता है।
- समान राष्ट्र के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती है।
- राष्ट्र की एकता अखंडता संपन्नता में वृद्धि होती है।
- राष्ट्र में स्थिरता आती है
सामाजिक गतिशीलता के दोष
- सामाजिक गतिशीलता में वर्ग संघर्ष समाप्त संभावना बढ़ सकती है।
- व्यक्ति का सामाजिक स्थिति में असंतुष्ट होना।
- जन्म के आधार पर ही लोगों को लाभ अथवा हानि की स्थिति में बने रहना।
- महत्वाकांक्षाओं में वृद्धि होना।
- व्यक्ति में गर्व तथा अहम की भावना का विकास।
- ग्रामीण तथा शहरी नागरिकों समाजों में अव्यवस्था।

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