किशोरों पर नगरीकरण एवं आर्थिक परिवर्तन का प्रभाव



भारत में आर्थिक परिवर्तन तेजी से हुए हैं और इन आर्थिक परिवर्तनों का परिणाम ही नगरीकरण है। आर्थिक परिवर्तनों ने समाज की आवश्यकता ही बदल दी है। अधिक भौतिक सुख सुविधाओं और प्रगति के अवसरों की ओर उन्मुख कर दिया है। ग्रामीण अंचल से लोग नगरों की ओर पलायन कर रहे है, नगरीकरण को समझने के लिए उसके विभिन्न स्वरूपों को समझना आवश्यक है।

नगरीकरण के विभिन्न स्वरूप

नगरीकरण के कुछ महत्वपूर्ण स्वरुप है जो की निम्न प्रकार है।

#1 गांव से नगरों की ओर

नगर पालिका के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भौगोलिक क्षेत्र नगर कहलाते है। सुनियोजित व्यवस्था के कारण बिजली, पानी, सड़क, बाजार, चिकित्सा, शिक्षा आदि की सुविधाएं अच्छी होती है। प्रगति के अवसर प्राप्त होते है। बहुत ही अच्छी सुख सुविधाएं उपलब्ध होती है। जीवन आसान हो जाता है, जीवन शैली में आधुनिकता आती है। गांव में यह सब उपलब्ध नहीं होता।

बढ़ती जनसंख्या ने गांव में अवसरों और संसाधनों की कमी होती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या ने जमीने भी कम कर दी है, रहने की जगह भी कम कर दी है। बड़े-बड़े आंगन वाले घरों की अपेक्षा आकार में छोटे-छोटे असुविधाजनक घरों में रहने को बाध्य कर दिया है।

#2 क्षेत्रों के रूप में परिवर्तन

शहरों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के रूप में परिवर्तन हो रहा है। धीरे-धीरे वह शहरों की विशेषताएं और प्रकृति धारण करते जा रहे है। गांव कस्बों में और कस्बे नगरों में बदल रहे है। शायद कहा जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों का नगरीय क्षेत्रों में परिवर्तन या ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या का पलायन भी नगरीकरण है।

आर्थिक परिवर्तन और प्रभाव

भारत में आर्थिक परिवर्तनों की चर्चा निम्न आधार पर की जा सकती है।

  1. भारत में कृषि सबसे महत्वपूर्ण व्यवसाय है, किंतु इस में लगातार कमी परिलक्षित हो रही है।
  2. औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार में काफी वृद्धि हुई है तथा कार्यरत श्रम शक्ति बढ़ी है।
  3. सेवा क्षेत्र के आकार में वृद्धि हुई है, व्यापार, वाणिज्य, संचार परिवहन व अन्य सेवाओं में वृद्धि हुई है।
  4. सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों में वृद्धि हुई है। निजी निवेश का झुकाव शहरों की ओर अधिक है।
  5. परिवहन संचार उर्जा बैंकिंग क्षेत्रों में गतिविधियों का प्रसार इस ओर संकेत करता है कि देश की आर्थिक आधारित संरचना का प्रसार और विकास हुआ है।

नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन ने किशोरों के लिए संभावनाओं के द्वार खोले है। यह सब किशोरों के व्यवहारिक लक्षणों से परिलक्षित होता है। नगरीकरण एवं आर्थिक परिवर्तन का किशोरों पर सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सकारात्मक प्रभाव

  1. आर्थिक परिवर्तन और नगरीकरण उपेक्षित और निर्बल वर्ग के बच्चों के लिए आर्थिक अवसरों का सृजन करते है।
  2. जाति प्रथा के कठोर बंधन धीरे-धीरे कम होते जा रहे है। सभी जातियों के किशोर एक साथ मिलजुल कर रहते हैं, काम करते हैं, शिक्षा लेते है।
  3. नगरों में लोग विभिन्नता के होते हुए भी एक जैसे सांचे में ढल जाते है। जिसका किशोरों के सामाजिक विकास पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है।
  4. नगरीकरण ने बालिकाओं की शिक्षा और रोजगार के द्वार भी खोले है। इससे बालिकाओं को बेहतर जीवन जीने का रास्ता मिल जाता है।
  5. किशोर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होते है।
  6. शहरी सुविधाएं और आर्थिक परिवर्तन किशोरों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम है।

नकारात्मक प्रभाव

  1. व्यवसायिक संगठनों में काम कर रहे उच्च अधिकारियों, इंजीनियर, डॉक्टर, विशेषज्ञ, इत्यादि की आय अक्सर अधिक होती है। इससे किशोरों की आकांक्षा होती है कि वह इन क्षेत्रों में जाएं। हमारे समाज में व्यवसायिक प्रशिक्षण की सुविधाएं सब को उपलब्ध नहीं हो पाती, केवल धनी वर्ग के बच्चों को ही उच्च शिक्षा और व्यवसायिक प्रशिक्षण कर पाते है। कृषि श्रमिकों औद्योगिक श्रमिकों एवं दलितों आदि के बच्चे वंचित रह जाते है।
  2. नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन के प्रभाव से किशोर पारंपरिक मान्यताओं को छोड़ देते है। धन उपार्जन से अपने स्तर को ऊंचा उठाना चाहते है। धर्म और समाज के आडंबर पूर्ण व्यवहार का विरोध करते हैं, यह एक अच्छी प्रवृत्ति है। किंतु इसके पीछे केवल भौतिक सुख-सुविधाओं का होना चिंताजनक है।
  3. बदलती आर्थिक परिस्थितियों ने किशोर को उपभोक्तावादी संस्कृति की ओर उन्मुख किया है।
  4. नगरीकरण ने किशोरों की वेशभूषा फैशन सभी को प्रभावित किया है, खाओ पियो और मस्त रहो की परंपरा से किशोर प्रभावित हो रहे है।
  5. किशोर की संचार माध्यमों में लिप्सा बढ़ती जा रही है।
  6. माता-पिता भी नगरों की भागमभाग की जिंदगी के कारण बच्चों को कम समय दे पाते हैं, फलत किशोर अपनी जिम्मेदारी से पृथक मर्यादा ही स्वच्छंद जीवन जीने के लिए लालायित हो उठते है।
  7. गांव से नगरों में आकर बसने वाले परिवारों को रहने की जगह नहीं मिलती। झुग्गी झोपड़ियों, मलिन बस्तियों के विकास का यही कारण है।
  8. नगरीकरण किशोरों में कुसमायोजन की समस्या भी पैदा करता है।
  9. पास पड़ोस मोहल्ले समुदाय में व्याप्त परिस्थितियों से समायोजन न कर पाने के कारण किशोरों में अनुचित और सामाजिक आदतों के पनपने का अवसर मिलता है।
  10. कुछ किशोर जो नगरों में पढ़ने लिखने के लिए आते हैं, उन्हें रहने और खाने-पीने की उचित व्यवस्था नहीं मिल पाती साथ ही समूह के प्रतिकूल के दबाव को भी सहना पड़ता है और अपनी व्यवसायिक आकांक्षाओं के कारण टिके रहना चाहते है। ऐसे किशोर विरोधी इच्छाओं व अभिलाषा ओं का ग्रास बन जाते है।
  11. नगरीकरण और बदलती आर्थिक स्थितियों ने किशोर में होड़ कर आगे निकलने की प्रवृत्ति को जन्म दिया है। जिससे उनमें मानसिक अस्वस्थता पनपती है, जिसकी साधन हीनता उन्हें अपराध के रास्ते पर ले जाती है।
  12. नगरीकरण और आर्थिक परिवर्तन ने सूचना प्रौद्योगिकी का द्रुत और तीव्र गति से विकास किया है।किशोर हर समय मोबाइल नेट पर लगा रहना चाहता है।
  13. किशोरावस्था में आत्म चेतना बहुत बढ़ जाती है। उसकी तीव्र इच्छा होती है कि लोग उसे बच्चा ना समझे। इसके लिए किशोर किशोर या दोनों ही नगरीकरण और बदलती आर्थिक स्थितियों के प्रभाव में अपना ध्यान वस्त्रों, केश सज्जा, रंग रूप निखारने, चलने फिरने आदि पर इतना अधिक लगाते हैं कि शैक्षिक उपलब्धियों से अलग हो जाते है।

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