किसी भी राष्ट्र के संपूर्ण विकास में नागरिकों का विशेष योगदान होता है। इसलिए नागरिकों का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। किसी भी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास शिक्षित नागरिकों से ही संभव हो पाता है, क्योंकि शिक्षित नागरिक ही अपने अधिकारों, कर्तव्य आवश्यकताओं के बारे में जानकारी रखता है। अतः राष्ट्र की शिक्षित आवश्यकता को पूरा करने के लिए शिक्षा को आवश्यक माना गया है।
सार्वभौमीकरण का अर्थ
एक निश्चित आयु के बालक बालिकाओं को निश्चित स्तर की विद्यालय शिक्षा आवश्यक रूप से प्रदान करना शिक्षा का सार्वभौमीकरण कहलाता है। इस संदर्भ में भारतीय संविधान की धारा के अंतर्गत शिक्षा के इस लक्ष्य को स्वीकार करते हुए कहते हैं कि प्रत्येक वर्ग के बालक बालिकाओं को बिना किसी धर्म, जाति, वर्ण, लिंग आदि भेदभाव के सभी को प्राथमिक स्तर की शिक्षा निशुल्क व अनिवार्य रूप से प्रदान की जाएगी।
सार्वभौमिकरण की आवश्यकता व महत्व
- साक्षरता का प्रसार करना।
- व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में मदद करना।
- दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग देना।
- राष्ट्रीय विकास में सहायक होना।
- व्यवसायिक जीवन व कार्यों में सफलता प्राप्त करना।
- लोकतंत्र को सफल बनाने में मदद मिलना।
- सामाजिक विकास को गति मिलना।
- बालकों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना।
- अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था व सद्भावना में सहयोग होना।
- वसुदेव कुटुंबकम की भावना में वृद्धि होना।
सार्वभौमिकरण की समस्याएं
सार्वभौमीकरण की कुछ विशेष समस्याएँ है जो की निम्नलिखित है।
#1 आर्थिक समस्याएं
- गरीबी अभिभावकों के आर्थिक स्थिति कमजोर।
- राज्यों के पास पर्याप्त बजट न होना।
- केंद्र द्वारा राज्यों को मदद न देना।
- पर्याप्त विद्यालयों का ना होना।
- विद्यालयों में संसाधनों का ना होना।
- जनसंख्या के अनुपात में विद्यालय का ना होना।
#2 सामाजिक समस्याएं
- अभिभावकों का शिक्षित न होना।
- सामाजिक बुराइयां।
- बालक बालिकाओं में भेदभाव।
- रूढ़िवादिता
- जाति प्रथा
#3 राजनीतिक समस्याएं
- शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप।
- सांप्रदायिक आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति।
- सांप्रदायिक आधार पर विद्यालयों का निर्माण।
- विभिन्न राज्यों का राजनीतिक आधार पर गठन।
#4 भौगोलिक समस्याएं
- दूरदराज के क्षेत्रों में विद्यालयों का ना होना।
- विद्यालयों में सुविधाओं का अभाव होना।
- नदिय व पर्वतीय क्षेत्रों में विद्यालय तथा संसाधनों का अभाव होना।
- पूर्वोत्तर राज्यों में प्राकृतिक एवं भौगोलिक कारणों से शिक्षण का सुचारू रूप से ना होना।
#5 शैक्षणिक समस्या
- दोषपूर्ण पाठ्यक्रम।
- एक समान पाठ्यक्रम ना होना।
- अच्छे योग्य व कर्मठ शिक्षकों का ना होना।
- भाषा की समस्या।
- भवन व सामग्री की समस्या।
- सहायक सामग्रियों का अभाव।
- दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली।
- अवरोध की समस्या।
- अव्यवहारिक शिक्षा एवं अमनोवैज्ञानिक शिक्षा
सार्वभौमिकता में आने वाली बाधाएं
- बढ़ती जनसंख्या
- गरीबी
- अशिक्षा
- भाषा की समस्या
- शिक्षकों की समस्या
- विद्यालय और संसाधनों की कमी
- पारिवारिक परिवेश
- सामाजिक कुरीतियां
- जातीय भेदभाव
- बालक बालिकाओं में अंतर
सार्वभौमीकरण को सफल बनाने के उपाय
- बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण।
- गरीबी दूर करके।
- अशिक्षा का समाप्त करके।
- सामान भाषा।
- विद्यालयों में शिक्षकों की बढ़ोतरी करना।
- विद्यालयों में संसाधनों की व्यवस्था करके।
- सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करके।
- बालक बालिकाओं को समान अधिकार प्रदान करके।
- बिना जातीय भेदभाव द्वारा।
सरकार द्वारा किए गए प्रयास
- निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा लागू करना।
- बालिकाओं के लिए निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा लागू करना।
- शिक्षा को पंचायती राज के अंतर्गत लाना।
- अधिक मात्रा में विद्यालय खोलना।
- दूरदराज के क्षेत्रों में विद्यालय खोलना।
- पिछड़े इलाकों में विद्यालय।
- एससी, एसटी व पिछड़े वर्ग को शिक्षा के लिए प्रेरित करना।
- ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड लागू करना।
- बालिकाओं के लिए अलग स्कूलों की व्यवस्था।
- बालिकाओं के लिए सरस्वती शिक्षा योजना संचालित करना।
- शिक्षा का सरल व सुलभ रोचक बनाने के लिए गुरु मित्र सर्व शिक्षा शिक्षा आपके द्वार घर घर शिक्षा प्राथमिक जिला शिक्षा कार्यक्रम जैसे कार्यक्रम लागू करना।
- स्कूलों में भोजन की व्यवस्था।
- विद्यार्थियों का बीमा कराना।
- विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देना।
- पाठ्यक्रम एवं शिक्षण सुविधाओं का समय - समय पर मूल्यांकन करना।
- शिक्षा के बजट में वृद्धि करना।

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