ज्ञान प्राप्त करने की विभिन्न विधियां



मनुष्य अपने जीवन में कुछ ना कुछ नया ज्ञान प्राप्त करता रहता है, इसलिए उसने ज्ञान प्राप्त करने के लिए अनेक नवीन विधियां खोज निकाली है। अधिकतर वह अपनी समस्या का समाधान प्रयास एवं भूल के सिद्धांत से करता है। समस्या समाधान के लिए वह एक उपाय का उपयोग करता है और उस उपाय के प्रभावकारी ना होने पर उसे छोड़कर वह दूसरे उपाय की परीक्षा करता है। इस प्रकार से समस्या समाधान के भेद को प्रयास एवं भूल का सिद्धांत कहते हैं, किंतु यह ज्ञान प्राप्त करने की प्रमाणिक विधि नहीं है।

ज्ञान प्राप्त करने की प्रमुख विधियाँ

ज्ञान प्राप्त करने की सामान्य रूप से कुछ विधियां मानी गई है, जो कि निम्नलिखित है।

#1 सत्ता

मानव सभ्यता में मनुष्य किसी ना किसी व्यक्ति में किसी ज्ञान के लिए आस्था रखता आ रहा है। अपनी समस्या के समाधान के लिए वह उसके पास जाता है और उसकी सलाह के अनुसार काम करता है। आज का व्यक्ति भी विशेषज्ञों की सलाह से काम करता है या उसकी राय को ही ज्ञान समझता है और अनेक परिस्थितियों में मनुष्य अपने पूर्वजों को सही मानता है और उनकी परंपराओं पर आंख मूंदकर विश्वास करता है।

अपनी संस्कृति में प्रचलित परंपरा को वह ज्ञान समझता है और उसे व्यवहार में लाता है, लेकिन इतिहास साक्षी है कि समाज में बहुत सा ज्ञान अंधविश्वास और अज्ञान का संग्रह मात्र रहा है। जैसे कई वर्ष पूर्व यह माना जाता था कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है लेकिन यह सिद्ध हो गया है कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है। अतः बहुत सारा ज्ञान अभी भी समाज में प्रचलित है जो कि समाज को अंधविश्वास की ओर अग्रसर करता है जैसे हिंदू समाज में प्रचलित कर्मकांड और कुप्रथाए।

#2 व्यक्तिक अनुभव

ज्ञान का दूसरा परिदृश्य व्यक्ति का अनुभव है। अपने अनुभव के आधार पर व्यक्ति सामान्य रूप से अपनी समस्याओं का समाधान करता है और अधिकतर मनुष्य अपने अनुभवों के आधार पर या किसी घटना के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं और फिर उसी के अनुसार आचरण करते है। जैसे ग्रामीण क्षेत्र में पशु पालन करने वाले लोग अपने अनुभव से यह जानते हैं कि किस प्रकार का चारा पशुओं को खिलाने से वे अधिक दूध देते है। लेकिन इस प्रकार की ज्ञान की अवधि निश्चित सीमा है, क्योंकि एक व्यक्ति का अनुभव दूसरे व्यक्ति के लिए पूर्ण रूप से उपयुक्त नहीं होता।

#3 निगमन विधि

यूनानी दार्शनिक अरस्तु के समय से लेकर बेकन के समय तक ज्ञान की जननी रही थी। इस विधि के माध्यम से ही किसी विषय वस्तु को मौलिक सत्य से प्रारंभ कर के उदाहरण द्वारा निष्कर्ष निकाला जाता था। जैसे मनुष्य मरण शील है और राजा एक मनुष्य है, अतः राजा मरण शील है। अतः निगमन विधि गुण पद को जांचने की एक मुख्य विधि है। यदि कोई व्यक्ति उपरोक्त दोनों कथनों से सहमत है तो उसे निष्कर्ष से भी सहमत होना पड़ेगा। इस विधि का प्रयोग सामान्यतः सैनिक, डॉक्टर, गुप्तचर आदि करते है। वर्तमान समय में अनुसंधानकर्ता ही इस विधि का प्रयोग करते है। इस विधि में गुणों के के साथ अनेक प्रकार के दोष भी है।

#4 आगमन विधि

निगमन विधि से निकाले गए निष्कर्ष तभी सत्य हो सकते होते हैं, जब मुख्य पद सत्य हो। आगमन विधि के आधार पर हम पदों को सामान्य करण कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए हमें विभिन्न प्रकार के उदाहरणों का प्रयोग करना होगा। इन उदाहरणों की सहायता से हम किसी विषय वस्तु, घटनाएं, धारणा को जांच सकते है। आगमन विधि के द्वारा नवीन ज्ञान की खोज की जा सकती है, किंतु यह विधि अपने आप में पूर्ण नहीं है। इसके द्वारा ज्ञान का सत्यापन नहीं किया जा सकता।

#5 वैज्ञानिक विधि

ज्ञान प्राप्त करने की सबसे प्राचीन एवं परंपरागत विधि व्याख्यान मानी जाती थी। किंतु इस विधि में अनेक प्रकार के दोष देखने को मिलते है। अतः समय के साथ अनेक प्रकार की वैज्ञानिक विधियों का जन्म हुआ। इन वैज्ञानिक विधियों के द्वारा ज्ञान प्रदान करना आसान हो गया, किंतु इन वैज्ञानिक विधियों की कोई एक निश्चित परिभाषा नहीं है।

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