मानव के लिए बुद्धि सर्वाधिक आवश्यक है इसलिए मानव बुद्धि के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करता रहता है। मानवो की तुलना तथा अन्य कारणों के लिए बुद्धि का मापन और परिक्षण अत्यंत आवश्यक होता है। किसी भी वस्तु का मापन दो प्रकार से हो सकता है - गुणात्मक मापन और मात्रात्मक मापन।
गुणात्मक मापन
जब मापन गुणों या विशेषताओं के आधार पर किया जाता है तो उसे गुणात्मक मापन कहते हैं। जैसे - छोटा, बड़ा, भारी, हल्का आदि।
मात्रात्मक मापन
जब मापन संख्याओं के आधार पर हो तब उसे मात्रात्मक मापन कहते हैं। जैसे - 75 किलो, 86% आदि। मात्रात्मक मापन दो प्रकार का होता है खंडित मापन और निरंतर मापन।
- खंडित मापन - जिन संख्याओं का उप विभाजन नहीं हो सकता उसे खंडित मापन कहते हैं। जैसे - परिवार में सदस्यों की संख्या, कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या।
- निरंतर मापन - जिन संख्याओं का विभाजन किया जा सके, उन्हें निरंतर मापन कहते हैं। जैसे - समय, लंबाई, रुपया इत्यादि।
बुद्धि का मापन बुद्धि लब्धि ( IQ ) के द्वारा किया जा सकता है, जो बुद्धि का मात्रक और मापन है और खंडित प्रकार का है। बुद्धि लब्धि के प्रत्यय को स्टर्न ने दिया। बुद्धि लब्धि मानसिक आयु और वास्तविक आयु का अनुपात है इसे सूत्र के द्वारा निकाला जा सकता है। मानसिक आयु मानक अंक का कार्य करती है।
बुद्धि परीक्षणों के प्रकार
माध्यम की दृष्टि से वर्गीकरण
माध्यम की दृष्टि से बुद्धि परीक्षणों को दो भागों में बांटा गया शाब्दिक और अशाब्दिक।
- शाब्दिक परीक्षण - जब बुद्धि मापने के लिए पूछे जाने वाले प्रश्न किसी भाषा में हो उसे शाब्दिक कहते हैं।
- अशाब्दिक परीक्षण - जब बुद्धि मापने के लिए आकृतियों का उपयोग हो उसे अशाब्दिक कहते हैं। कुछ विद्वान इसे निष्पादन परीक्षण भी कहते हैं, लेकिन दोनों में अंतर है निष्पादन परीक्षण वहां होगा, जहां छात्र अपने हाथ में किसी हाथ से किसी वस्तु का निर्माण करेगा।
शाब्दिक परीक्षण शिक्षित लोगों पर किया जा सकता है जबकि अशाब्दिक शिक्षित और अशिक्षित दोनों पर किया जा सकता है।
प्रशासन की दृष्टि से
प्रशासन की दृष्टि से बुद्धि परीक्षण को दो भागों में बांटा जा सकता है वैयक्तिक बुद्धि परीक्षण और सामूहिक बुद्धि परीक्षण।
- वैयक्तिक बुद्धि परिक्षण - जिस बुद्धि परीक्षण के द्वारा एक समय में एक ही छात्र की बुद्धि का मापन किया जा सके, उसे वैयक्तिक बुद्धि परीक्षण कहते हैं। इन परीक्षणों का लाभ यह है कि मैत्रीभाव जल्दी विकसित होता है, जिससे परीक्षण चिंता कम हो जाती है।
- सामूहिक बुद्धि परिक्षण - यह वह बुद्धि परीक्षण है, जिसके द्वारा एक समय में एक से अधिक छात्रों की बुद्धि का मापन किया जा सकता है। इन परीक्षणों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि समय और धन की बचत होती है।
इन परीक्षणों का आरंभ पहले विश्व युद्ध में सेना के मनोवैज्ञानिकों द्वारा किया गया। जहां उन्होंने 2 बुद्धि परीक्षण बनाए आर्मी अल्फा और आर्मी बीटा। जहां आर्मी अल्फा शाब्दिक परीक्षण था और आर्मी बीटा अशाब्दिक परीक्षण था।
समय की दृष्टि से वर्गीकरण
समय की दृष्टि से बुद्धि परीक्षणों को दो भागों में बांटा गया गति तथा शक्ति परिक्षण।
- गति परीक्षण - जिस परीक्षण को करने की समय सीमा निर्धारित हो उन्हें गति परीक्षण कहते हैं।
- शक्ति परीक्षण - जिस परीक्षण को करने की समय सीमा निश्चित ना हो उसे शक्ति परीक्षण कहते हैं।
बुद्धि परीक्षणों का आरंभ
गाल्टन ने बुद्धि मापन का एक परीक्षण बनाया जिससे गाल्टन सीटी परीक्षण कहते हैं। जो व्यक्ति बुद्धि मापन के लिए आता है उसे सीटी बजाने को कहा जाता है जो जोर से बजाता है उसे बुद्धिमान कहते हैं और जो धीरे से जाता उसे कम बुद्धिमान कहते हैं।
अफ्रीका के जंगलों में एस्कवरल को एक छोटा बालक मिला जिसने एक भी वस्त्र नहीं पहना हुआ था। वह जानवरों की तरीके से बोल रहा था,खा रहा था और चल रहा था। एस्कवरल ने उसे जड़ बुद्धि कहा। लेकिन उनके विद्यार्थी पीनल और सेगवन ने कहा कि यह जड़ बुद्धि नहीं है। यह ऐसा व्यवहार इसलिए कर रहा है क्योंकि वह जन्म से ही समाज से दूर रहा है। उस समय सेगवन ने बुद्धि मापन का एक परीक्षण बनाया जिससे सेगवन फार्म बोर्ड परीक्षण कहते हैं।
फ्रांस सरकार के सामने कक्षा में छात्रों को पढ़ाने की सदस्य समस्या आई, क्योंकि कक्षा के कुछ छात्र प्रतिभाशाली होते हैं और कुछ औसत और कमजोर। फ्रांस सरकार बुद्धि मापन का एक वस्तुनिष्ठ विधि चाहती थी, इसलिए 1904 में बिने की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन हुआ, जिसे बुद्धि मापन के वस्तुनिष्ठ विधि बताने को कहा गया।
इस आयोग के परिणाम स्वरुप 1905 में बिने ने अपने साथी साइमन के साथ मिलकर पहला मानवीकृत बुद्धि परीक्षण बताया, जिसे बिने साइमन बुद्धि मापनी के नाम से जाना जाता है। 1908 में इसका पहला संशोधन हुआ और 1911 में इसका दूसरा संशोधन हुआ और इसी वर्ष बिने का देहांत हो गया।यहां से बुद्धि परीक्षणों का आरंभ हो गया। मानसिक आयु प्रत्यय का उपयोग सबसे पहले बिने ने किया।
बिने के बुद्धि परीक्षण ने विश्व के मनोवैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। अमेरिका में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में काम करने वाले मनोवैज्ञानिक टरमन भी इसी तरफ आकर्षित हुए और उन्होंने 1916 में बिने के परीक्षण में कुछ परिवर्तन करते हुए एक बुद्धि परीक्षण बना दिया, जिसे स्टैनफोर्ड बिने बुद्धि मापनी के नाम से जाना जाता है।
यह वह पहला बुद्धि परीक्षण है जिसमें आईक्यू का उपयोग किया गया। 1937 में इसका संशोधन किया गया और इसके दो प्रारूप बनाए गए L प्रारूप और M प्रारूप। 1960 में फिर संशोधन हुआ और दोनों प्रारूपों को मिलाकर एक प्रारूप बना दिया गया। 1986 में फिर संशोधन हुआ, 2003 में फिर संशोधन हुआ। इस प्रकार बुद्धि परीक्षाओं का आरंभ हो गया। भारत में लाहौर विश्वविद्यालय में राइस ने बिने परीक्षण का भारतीयकरण किया।
- वेश्लर व्यस्क बुद्धि मापनी - 1955 में वेश्लर ने व्यस्क लोगों की बुद्धि मापन का एक परीक्षण बनाया, जिसे डब्ल्यू ए आइ एस के नाम से जाना गया।
- वेश्लर की बच्चों की बुद्धि मापनी -1945 में वेश्लर ने 5 साल से अधिक के बच्चों की बुद्धि का मापन का एक परीक्षण बनाया, जिसे वेश्लर का बुद्धि मापनी कहा जाता है। 1974 में इस परीक्षण में संशोधन किया गया और इसे WISC - R कहा गया। 1993 में फिर संशोधन किया गया और इस WISC 3 हो गया।
- वेश्लर पूर्व प्राथमिक बुद्धि मापनी - कैटल और रेवन ने बुद्धि परीक्षण बनाएं, जिन्हें संस्कृति मुक्त परीक्षण कहते हैं। अथार्थ विश्व में बिना परिवर्तन किए कहीं भी दिए जा सकते हैं।
भारतीय बुद्धि परीक्षण
भारत में जलोटा, जोशी ने ने बुद्धि मापन के परीक्षण बनाए जो कि शाब्दिक थे और इन्हें करने का अधिकतम समय 20 मिनट था। यह दोनों परीक्षण बुद्धि के तीन आयामों का मापन करते हैं। शाब्दिक, आंकिक और तार्किक। इन्होंने तार्किक योग्यता को मापने के लिए एक विधि का उपयोग किया जिसे एनालॉजी कहते हैं। एनालॉजी का अर्थ एक वस्तु का संबंध दिया जाता है और उसी आधार पर दूसरी वस्तु के संबंध को बताना होता है।
भाटिया निष्पादन बुद्धि बैटरी
इस परीक्षण में चंद्रोदय भाटिया ने बनाया और इसमें कुल 5 परीक्षण है। कोह ब्लॉक डिजाइन परीक्षण, पास एलोंग परीक्षण, पैटर्न चित्रण परीक्षण, चित्र निर्माण परीक्षण, तात्कालिक स्मृति परीक्षण।
#1 कोह ब्लॉक डिजाइन परीक्षण
इस परीक्षण में कोह ने बनाया था और भाटिया ने इसे अपने परीक्षण में लिया। इसे उपपरीक्षण में छात्र के सामने एक डिजाइन और उसे लकड़ी के रंगीन टुकड़े किए जाते हैं और उन्हें जोड़कर उसे वही डिजाइन बनाना है जो कार्ड पर बना है। इसमें कुल 10 डिजाइन है, जिनकी कठिनाई क्रमशः बढ़ती जाती है। एक से पांच के लिए अधिकतम समय 2 मिनट है और छह से दस के लिए 3 मिनट। जहां छात्र लगातार दो बार असफल हो जाएगा वहां यह परीक्षण रोक दिया जाएगा। इस प्रकार यह परीक्षण निष्पादन, वैयक्तिक और गति की श्रेणी में आता है।
#2 पास अलोंग परीक्षण
इस परीक्षण को अलेक्जेंडर ने बनाया और भाटिया ने अपने परीक्षण में लिया। इसमें छात्र के सामने एक कार्ड रख दिया जाता है, जिस पर एक डिजाइन बना होता है और उसे लकड़ी के टुकड़े दे दिए जाते हैं जिन्हें बिना उठाए वही डिजाइन बनाना है जो कार्ड पर बना है। इसमें कुल 8 डिजाइन है। इस प्रकार यह परीक्षण निष्पादन, वैयक्तिक और गति की श्रेणी में आता है।
#3 पैटर्न चित्रण परीक्षण
इस परीक्षण में ज्यामितीय आकृतियां बनी हुई है जिन्हें देखकर छात्र को बनाना है। शर्त यह है कि बनाते समय पेन को उठा नहीं सकते और बनी हुई रेखा पर दोबारा जा नहीं सकते। इसमें कुल 10 डिजाइन है इइस प्रकार यह परीक्षण निष्पादन, वैयक्तिक और गति की श्रेणी में आता है।
#4 चित्र निर्माण परीक्षण
यह परीक्षण भाटिया ने स्वयं बनाया। इसमें भारतीय परिपेक्ष के अनुसार चित्र बनाकर उन्हें टुकडों में काट दिया गया। छात्रों को उन टुकड़ों को जोड़कर एक पुत्र पूरा चित्र बनाना है। इसमें कुल 8 डिजाइन है। इस प्रकार यह परीक्षण निष्पादन, वैयक्तिक और गति की श्रेणी में आता है।
#5 तात्कालिक स्मृति परीक्षण
तात्कालिक स्मृति के प्रत्यय को जैकब ने दिया। इसका अर्थ है कि सुनने के बाद छात्र कितनी संख्याओ तक सही बोल सकता है। भाटिया ने अपने उपपरीक्षण में गणित के अंक और हिंदी वर्णमाला के शब्द लिए। इनका कहना था अगर छात्र शिक्षित है, तब उसे गणित के अंक देनी चाहिए और अगर अशिक्षित है तो हिंदी के वर्णमाला देने चाहिए।
भाटिया बैटरी के द्वारा बुद्धि के दो गुणांकों का मापन होता है - IQ और PQ अर्थात निष्पादन लब्धि है। IQ को ज्ञात करने के लिए पांचों परीक्षणों के प्राप्त अंकों को जोड़ा जाता है, जबकि PQ को ज्ञात करने के लिए केवल पहले चार निष्पादन परीक्षण में प्राप्त अंकों को जोड़ा जाता है।

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