मानव एक सामाजिक प्राणी है। मानव का विकास जीवन भर चलता रहता है। मानव का विकास एक निश्चित नियम के अनुसार होता है और इस विकास को कई कारक प्रभावित करते हैं। आज इस लेख में हम मानव के शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारक
1. वंशानुक्रम
वंशानुक्रम या आनुवांशिकता शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाला सर्वप्रथम कारक है। प्राणी की उत्पत्ति माता पिता के बीच कोषों के सहयोग से होती है। माता पिता के शीलगुणों का बालक पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। सवस्थ माता पिता की संतान प्राय सवस्थ होती है। रोगी और निर्मल माता पिता की संतान प्राय निर्बल और रोगी होती है। बेनेडिक्ट के अनुसार आनुवांशिकता माता पिता के जैविक गुणों का संपत्ति हस्तांतरण है।
2. वातावरण
वातावरण के मुख्यतः तीन आयाम होते हैं। भौगोलिक वातावरण, सामाजिक वातावरण तथा मानसिक वातावरण। अनुकूल वातावरण शारीरिक विकास पर अनुकूल प्रभाव डालता है, जबकि प्रतिकूल वातावरण प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
3. पौष्टिक भोजन
बालक का सवस्थ एवं स्वाभाविक विकास विशेष रूप से पौष्टिक तथा संतुलित आहार पर निर्भर होता है। सोरेंसन ने कहा है कि पौष्टिक भोजन थकान का प्रबल शत्रु और शारीरिक विकास का परम मित्र है।
4. नियमित दिनचर्या
बालक के शारीरिक विकास पर नियमित दिनचर्या का प्रभाव पड़ता है। उसके खाने पीने, पढ़ने, लिखने, सोने आदि के लिए समय निश्चित होना चाहिए। अतः सवस्थ एवं स्वाभाविक विकास के लिए बालक में प्रारंभ से ही नियमित जीवन बिताने की आदत डालनी चाहिए।
5. विश्राम
शरीर के सवस्थ विकास के लिए निद्रा और विश्राम आवश्यक है। तीन चार वर्ष के शिशु के लिए 12 घंटे की निद्रा आवश्यक है। बाल्यावस्था और किशोर अवस्था में क्रमशः 10 और 8 घंटे की निद्रा प्राय पर्याप्त होती है। बालक को इतना विश्राम मिलना आवश्यक है कि उसकी क्रियाशीलता से उत्पन्न होने वाली थकान पूरी तरह दूर हो जाए।
6. व्यायाम, खेलकूद व मनोरंजन
सदैव काम करते रहना तथा खेलकूद न करना, मनोरंजन के अवसर न मिलना बालक के विकास को बंद कर देता है। इस प्रकार शारीरिक विकास के लिए व्यायाम व खेल कूद अपरिहार्य है।
7. प्रेम
बालक की शारीरिक विकास पर माता पिता व अध्यापक के व्यवहार का असर होता है। यदि बालक को इनसे प्रेम और सहानुभूति नहीं मीलती है तो वह दुखी रहने लगता है। जिससे उसके शरीर का संतुलित और स्वाभाविक विकास नहीं हो पाता।
8. सुरक्षा
शिशु या बालक के सम्यक विकास के लिए उसमें सुरक्षा की भावना अति आवश्यक है। इस भावनाओं के प्रभाव में वह भय का अनुभव करने लगता है और आत्मविश्वास खो बैठता है।
9. पारिवारिक परिवेश
परिवार ममता का स्थल होता है। परिवार द्वारा ही बाल कोसने, सहयोग, संरक्षण, सहानुभूति प्राप्त होती है, जो उसके शारीरिक विकास के लिए नितांत आवश्यक है।
10. अन्य कारक
शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कुछ अन्य कारक भी है जैसे शारीरिक विकृतियां, जलवायु, सामाजिक परंपराएं, परिवार की आर्थिक स्थित इ परिवार का रहन सहन, विद्यालय शिक्षा आदि।
निष्कर्ष
इस लेख में मैंने मानव के शारीरिक विकास को प्रभावित करने वाले कारको के बारे में विस्तार से चर्चा की है। उम्मीद है यह लेख आपको बहोत अधिक पसंद आया होगा।

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