शिक्षा की अवधारणा एवं शिक्षा का अर्थ



मानव जीवन में शिक्षा का विशेष महत्व है। शिक्षा के द्वारा ही बालक अपने संपूर्ण ज्ञान, व्यक्तित्व एवं प्रवृत्तियों का विकास करता है। जैसा कि लॉक कहता है मनुष्य के विकास में शिक्षा का वही महत्व है, जो पौधों के विकास में कृषि का तथा शारीरिक विकास में भोजन का होता है। शिक्षा मनुष्य की समस्त शक्तियों का स्वभाविक एवं प्रगतिशील विकास है।

शिक्षा का अर्थ कितने प्रकार से बताया जाता है ?

शिक्षा का अर्थ पांच प्रकार से बताया जा सकता है।

#1 शाब्दिक अर्थ

शिक्षा को अंग्रेजी में एजुकेशन कहते हैं एजुकेशन शब्द लैटिन भाषा की तीन शब्दों से मिलकर बना है।

  1. एजुकेटम का अर्थ है प्रशिक्षण देना
  2. एज्युसियर का अर्थ है बाहर निकालना
  3. एज्युकेयर का अर्थ है विकसित करना

इस प्रकार शिक्षा का अर्थ है बालक के अंदर निहित गुणों एवं शक्तियों का विकास करना और उन्हें आगे बढ़ाना। भारतीय परंपरा में संस्कृत साहित्य के अनुसार "शिक्षा शब्द शिक्ष धातु से बना है, जिसमें आ प्रत्यय लगाने पर शिक्षा शब्द की उत्पत्ति होती है। जिसका अर्थ है जानना, विद्या ग्रहण करना, ज्ञान प्राप्त करना।

#2 संकीर्ण अर्थ

विद्यालय महाविद्यालय में दी जाने वाली शिक्षा संकीर्ण शिक्षा कहलाती है, यह शिक्षा निश्चित समय, निश्चित विधि, निश्चित व्यक्ति द्वारा दी जाती है। जिसके कारण यह किताबी शिक्षा भी कहलाती है। इसमें बालक का संपूर्ण विकास नहीं हो पाता क्योंकि यह रटने की प्रवृत्ति पर बल देती है।

#3 व्यापक अर्थ

वह शिक्षा जो जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत आजीवन चलती रहती है, उसे व्यापक शिक्षा कहा जाता है। डंबल कहता है "शिक्षा के व्यापक अर्थ में हम उस शिक्षा को लेते हैं जो जन्म से मृत्यु तक की यात्रा के बीच प्राप्त करते है"।

मैकेंजी के अनुसार "जीवन के उस प्रत्येक अनुभव एवं ज्ञान को हम शिक्षा के व्यापक अर्थ के रूप में लेते हैं जिसमें अनुभव के आधार पर निरंतर वृद्धि होती रहती है"।

#4 शिक्षा का मनोवैज्ञानिक अर्थ

मनोवैज्ञानिक आधार पर शिक्षा बालक की आवश्यकता रुचि योग्यता आदि के अनुसार बालक को समझने शिक्षित करने पर बल देती है। यह शिक्षा बिना किसी दबाव के बालक का सर्वांगीण विकास करने के लिए प्रेरित करती है।

#5 शिक्षा का वास्तविक अर्थ

शिक्षा एक सामाजिक एवं गतिशील प्रक्रिया है, जो व्यक्ति के अंदर निहित जन्मजात गुणों का विकास कर उसके व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करती है, साथ ही सामाजिक वातावरण के साथ समायोजन करना सिखाती है।

त्यागी एवं पाठक के अनुसार "शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो मनुष्य की जन्मजात प्रवृत्तियों के स्वभाविक सामंजस्य पूर्ण विकास में योगदान देती है, उसे अपने कर्तव्य एवं अधिकारों का बोध कराती है साथ ही समय विचार एवं व्यवहार के अनुसार सामंजस्य एवं परिवर्तन करना भी सिखाती है ताकि व्यक्ति समाज तथा देश के लिए शिक्षा लाभकारी हो सके"।

शिक्षा के अर्थ संबंधी महत्वपूर्ण परिभाषाएं

  1. स्वामी विवेकानंद के अनुसार शिक्षा मनुष्य में निहित देवी अपूर्णता का प्रत्यक्षीकरण है।
  2. महात्मा गांधी के अनुसार शिक्षा से मेरा तात्पर्य बालक के शरीर मस्तिष्क तथा आत्मा का उत्कृष्ट विकास है।
  3. अरस्तु के अनुसार शिक्षा व्यक्ति की शक्ति का शारीरिक मानसिक सामाजिक व नैतिक विकास करती है, जिससे वह परम सत्य का आनंद उठा सके।
  4. जॉन डीवी के अनुसार शिक्षा के अनुभव के सतत पुनर्निर्माण के माध्यम में से जीवन की वह प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास करता है तथा पर्यावरण के साथ सामंजस्य सीखता है।

शिक्षा की प्रकृति

शिक्षा लगातार चलने वाली प्रक्रिया है शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है शिक्षा विकास की प्रक्रिया है शिक्षा गतिशील प्रक्रिया है शिक्षा सामान्य व समायोजन की प्रक्रिया शिक्षा सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया है

#1 अनौपचारिक शिक्षा

वह व्यवहारिक शिक्षा है जिसे बालक जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत प्राप्त करता रहता है। इसे वह अपने कार्य व अनुभवों द्वारा प्राप्त करता है। जिसमें किसी भी प्रकार के निश्चित नियम नियोजन तरीके समयावधि व उपायों की आवश्यकता नहीं होती, इसे बालक खेल-खेल में घर, परिवार तथा आसपास के वातावरण में रहकर सीखता है। बेन्टोक ने कहा है कि शिक्षा सभी प्रकार के अनुभवों का योग है, जिसे मनुष्य अपने जीवन काल में प्राप्त करता है। विशेषताएं - यह शिक्षा सरल व स्वाभाविक होती है, यह प्राकृतिक होती है, यह व्यक्ति की रुचि व मूल प्रवृत्तियों पर निर्भर करती है, यह मनुष्य को अवसर का लाभ उठाने की योग्यता सिखाती है, यह सुखद एवं मनोरंजन है, यह जीवन पर्यंत चलती रहती है।

#2 निरौपचारिक शिक्षा

शिक्षा के दोनों प्रकारों के मध्य का रास्ता निरौपचारिक शिक्षा कहलाता है, खुला विश्वविद्यालय प्रोड शिक्षा जिससे कि कार्यक्रम इसके अंतर्गत आते है। शिक्षा का यह नया स्वरूप है इसमें औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों प्रकार की शिक्षा के गुण पाए जाते है। इसकी विशेषताएं निम्न प्रकार है यह शिक्षा कम खर्च में लाभ के सिद्धांत पर कार्य करती है, इसका अस्तित्व प्राचीन समय से रहा है, अधिक जनसंख्या, गरीबी, बढ़ती दूरियां जैसी समस्याओं में यह लाभकारी है। दुर्गम स्थानों के लिए लाभकारी है। क्षेत्र में औपचारिक शिक्षा के सामान्य सम्मान दिया जाता है।

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